द टेरेस


“नहीं हुआ? ऐसे कैसे नहीं हुआ? तैय्यरी ठीक से नहीं करी थी?”

“करी तो थी, पापा”,

“तो फिर?, 3 महीने हुए नौकरी से निक़ाले हुए, कब तक उस शहर में अकेला रहेगा”,

“अभी हैं काफ़ी सेविंग्स, और 1-2 जगह और बात चल रही है, कुछ ना कुछ हो जाएगा”, सूरज अभी थोड़ा झुंझला सा गया था, “यह अपनी फालतू किताबों पे खर्चा बंद करो, अपना पैसा बचा के चलो”, सूरज का मन तो था की उसी वक़्त फोन पटक दे, लेकिन उसके मुँह से सिर्फ़ “जी” निकल पाया. “मेरी मानकर सीय कर लेता, तो नौकरी जाने वाली नहीं मिलती. सेफ रहता, ये एम्बीअ की नौकरी कहाँ सेफ रहती है आजकल, आज है कल नहीं”, सूरज इस बात पर चुप ही रहा.

“अच्छा सुन”, पापा ने आवाज़ थोड़ी धीरे कर के कहा, “पैसे भेज पाएगा इस महीने, छोटे की बाइक का ईमआइ भरनी है, और वो फ्रिड्ज भी नया लिया था”, “जी, भेज दूँगा, अच्छा अभी जाना है, बाद में बात करता हूँ”. “कहाँ जाना है?”, “खाना खाने जाना है, लेट हो रहा है बहुत” सूरज के सब्र का बाँध अभी बस टूटने ही वाला था, “हान्ं, तो जा, रोका किसने है”, “ओके बाइ” बोलते ही सूरज ने फोन काट कर सीधा अपने बिस्तर पे ज़ोर से फेंका. उसका नया ब्लॅकबेरी बिस्तर पर 2 टप्पे खा कर सीधा फर्ष पर गिरा. भक साला, अब तू ना टूट जइयो कह कर उसने फोन उठा कर देखा तो साँस में साँस आई, फोन सलामत था.

साला यह 13 हज़ार का फोन भी नौकरी जाने से 1 महीने पहले लेना था, सूरज का मन तो किया की एक बार और इस फोन को कस के फ़र्श पे फेंके लेकिन फिर शायद प्राइस टॅग याद करके रुक गया. तीन महीने पहले ग्लोबल रिसेशन के चलते उसकी कंपनी ने काफ़ी एंप्लायीस को निकाला था, सिर्फ़ उसकी नहीं, दुनिया भर की कंपनीज़ का यही हाल था. लेकिन यह बात मेरे बाप को कौन समझाए, उन्हें तो बस यही लगता है की सीय कर लेता तो पता नहीं क्या उखाड़ लेता, सूरज ये सोचते सोचते अपने कमरे से निकल कर बिल्डिंग की टेरेस पे जा पहुचा.

टेरेस पे एक बरसाती खाली रहती थी, और उसके उपर जाने के लीयें लोहे की सीडीयाँ बनी हुई थी, बस वही एक जगह थी जहाँ सूरज को सबसे ज़्यादा सुकून मिलता था.

“साले, इतनी बात में अपनी बंदी से नहीं करता जितनी तू अपने घरवालों से कर लेता है”, रोहन छत पर पहले से ही पूरे तामझाम के साथ तैनात था. नयी नयी गर्लफ्रेंड बनाई थी, और यह बात किसी ना किसी तरीके से वो बातचीत में उठा ही देता था.

“हाँ भाई, मालूम है तू बंदी वाला है, बार बार क्यूँ बता के जलाता है”, सूरज उसके सामने जाकर छत पर ज़मीन पर ही बैठ गया.

“यह क्या फॉस्टर्ज़ उठा कर लाया है, बडवाइज़र नहीं थी क्या?”, सूरज ने फॉस्टर्ज़ की एक कॅन खोलते हुए कहा.

“तेरा कोगनिज़ांट का क्या हुआ”, रोहन ने चियर्स करते हुए पूछा. “नहीं हुआ बेहेन्चो, पता नहीं 6 लाख में उन्हें कौनसा मॉडेलर चाहिए था”. “फक साला, 2 टके की कंपनी और नखरे इतने, तेरा तो प्रोफाइल एक्दुम मॅच का था”, रोहन ने कुरकुरे का पॅकेट खोलते हुए कहा.

अछा लगता है जब सामने वाला भी गाली देने में तुम्हारा साथ दे तो. हिम्मत बनी रहती है, और लगता है की तुममे कोई खराबी नहीं है, बस साली दुनिया ही कमिनि है.

“अभी केपजेमिनी का आना बाकी है, और डेलाय्ट का इंटरव्यू मंडे को, देखो क्या होता है”. “मेरी बात हुई थी राकेश से, तेरा फीडबॅक अच्छा गया है केपजेमिनी में, सोल्लिड चान्स है”, रोहन ने ही अपने दोस्त से कहकर सूरज का रेज़्यूमे वहाँ डलवाया था. “इंटर्नल रेफरेन्स से चान्स बड़ जाता है भाई, वहाँ का तू डन समझ”, रोहन ने दूसरी कॅन सूरज को थमाते हुए कहा. “हो गया ना, तू तुझे टीचर्स पिलायुंगा” सूरज ने दूसरी कॅन गटकते हुए कहा, “भक सला, ब्लॅक लेबल खुलेगी उस दिन”.

“वैसे क्या बात है, तेरा फोन नहीं बजा अब तक?” सूरज अब थोड़ा शांत महसूस कर रहा था. शायद बियर इसकी वजह थी, या दोस्त से बकर्चोदि या शायद दोनों.

“हाहाहा, वो बस प्रिया अपनी बुआ के यहाँ पार्टी में गयी है, लेट हो जाइएगी आते आते”, “वैसे कैसा चल रहा है तुम्हारा?” सूरज ने पूछ तो लिया लेकिन मन ही मन सोच रहा था की ग़लती कर दी, अब तो यह पूरा डीटेल में सुना कर वापस जलाएगा.

लेकिन यह सवाल पूछते ही रोहन के चेहरे से रंग उतर गया, “पता नहीं यार, चल रहा है, देखो कब तक ऐसे चलेगा”. सूरज एकद्ूम आश्चर्यचकित था, 8 महीने से पीछा करने के बाद, प्रिया ने बस 2 महीने पहले हाँ बोला था, और पूरे पूरे दिन तो रोहन उसीके साथ फोन और स्क्यपे पे लगा रहता था, खुश भी लगता था, अचानक से ये क्या हुआ.

“लोंग डिस्टेन्स की वजह से कुछ प्राब्लम है क्या”, सूरज ने पूछा. रोहन बंगलोरे में था और प्रिया देल्ही में, तो कुछ इश्यू होना तो लाज़िमी था. “नहीं यार….शायद वो भी, पता नहीं कुछ समझ नहीं आ रहा” रोहन अभी अपनी बियर कॅन भूल कर सिर्फ़ उपर आसमान में देख रहा था.

“तुझे याद है उसका एक्स बाय्फ्रेंड”, रोहन ने काफ़ी देर तक आसमान में ताकने के बाद कहा. “हाँ, बताया था तूने, क्यूँ वापस आ गया क्या”?, “साला उससे भी बदत्तर,” रोहन ने थोड़ा चिल्लआते हुए बोला, “उसकी याद वापस आ रही है मेडम को”, “क्या? कुछ भी बोल रहा है”, “नहीं बे, लास्ट वीक मैने उससे जानू बुलाया, तो मेडम रोने लगीं, जब पूछा तो बोला कोई और भी मुझे यह बुलाता था”, रोहन अब काफ़ी गुस्से में था, “अब साला, उसका एक्स उससे जानू बोलता था, तो अब मैं अपनी करेंट गर्लफ्रेंड को कभी जानू नहीं बोल सकता क्या? क्या चूतियापा मचा रखा है. उपर से जब मैं देल्ही में था, तब हम 3 डेट पे गये, और मुझे एक किस तक नहीं करने दिया”, रोहन अब रुकने वाला नहीं था, “कहती है, लेट्स टेक इट स्लो बेबी, चलो ले लिया बेबी ने स्लो, और फिर कल, मम्मी को तुमसे मिलना है, नेक्स्ट टाइम आओ तो ढंग क कपड़े साथ लेकर आना. 1 महीने पहले स्लो था, अब मम्मी को मिलना है, और मेरे कपड़ों में इतनी प्राब्लम थी तो रहना था अपने एक्स क साथ”. सूरज ने कभी भी रोहन को इतने गुस्से में नहीं देखा था लेकिन वो भी एक चुटकी लेने से बाज़ नहीं आया. “मतलब तूने उसे आजतक किस तक नहीं करा, ब्वाहाहहाहाहहा”, सूरज हंसते हंसते छत पर लेट ही गया, “हंस ले बेहेन्चोद, तुझसे तो कभी बंदी पटनि भी नहीं है” रोहन चाहे गुस्से में था लेकिन सूरज को हंसता देख उसके चेहरे पे भी एक हल्की सी हँसी आ ही गई थी. या शायद वो बियर का असर था.

“अच्छा सॉरी सॉरी, सीरियस्ली, पक्का सीरियस्ली, वैसे मम्मी से क्यूँ मिलना है” सूरज अब उठ कर मुंडेर के सहारे बैठ गया था. “शादी की बात और क्या”, रोहन अभी उदास सा हो गया था, “मतलब प्यार से बात करो तो पुराने बाय्फ्रेंड की याद, और शादी करने के लीयें मैं, क्या बकवास है यह”. “और तुमने तो अभी किस तक नहीं किया”, सूरज को रोहन की चुटकी लेने में मज़ा आ रहा था. “साले, तू तो बोल मत, रोज़ बाप से गाली ख़ाता है इस उम्र में, मैं कम से कम फोन सेक्स तो कर ही लेता हूँ कभी कभी”

“अबे यार, किसका नाम ले रहा है, सारा मूड खराब कर दिया”, अब आसमान में ताकने की सूरज की बारी थी. “साला, ज़िंदगी में सिर्फ़ 2 साल गाली नहीं खाया, जिन 2 सालों में 8 लाख की नौकरी थी, अब नौकरी गयी तो गाली फिर वापस आ गयी. मतलब मेरे बाप के सामने मेरी औकात सिर्फ़ मेरी नौकरी से है, नौकरी है तो मैं बहुत समझदार, नौकरी नहीं तो नालयक, फक यार, क्या झंड ज़िंदगी है”.

“सही कह रहा है यार”, रोहन ने तीसरी कॅन खोलते हुए बोला, “बस लेकिन अभी बहुत हो गया, कब तक तू अपने बाप से गाली खाएगी और में प्रिया के पीछे दुम हिला क भागुंगा. आज ख़तम करते हैं ये सब. आज तो याल्गार हो!” रोहन ने अपने हाथ खड़े करके रेयलिटी शो के उस जड्ज की तरह कहा तो सूरज भी हंस पड़ा, “मुझे अपने दोस्त के होठों पर क़िस्स्स चाहिए म्यलॉर्ड, फोन सेक्स का पप्लू नहीं” सूरज ने भी उसी जड्ज की तरह एक और डाइलॉग मारा.

“देख अब टाइम है डाइरेक्ट एक्षन का, कल तू अपने बाप को फोन कर और बोल की वो ग़लत है और तू सही, और मैं कल प्रिया को फोन करके बोलूँगा की बस अभी और नहीं, वी आर ब्रेकिंग उप, नो इफ़ नो बट ओन्ली ब्रेक-उप”, शायद रोहन को 3 कॅन बियर ही चढ़ गयी थी.

“जाने दे यार, एक किस तो कर ले कम से कम, और मैं अपने बाप के मुँह नहीं लग रहा”, सूरज ने तीसरी बियर ख़तम करते हुए कहा.

इतनी देर में रोहन का फोन बजने लगा, डिसप्ले में दिखा रहा था “प्रिया कॉलिंग”, सूरज कहने ही वाला था की अभी फोन मत उठा जितनी देर में रोहन ने फोन पिक करा.

“आई मिस यू टु, लेकिन तुम तो पार्टी में थी ना”, “ओह, कुछ नहीं मैं बस सुरज के साथ..”, “क्या….क्या…ओह..ओके, बाइ”.

“तू तो ब्रेक उप कर रहा था, अभी क्या हुआ”, सूरज ने रोहन के फोन रखते ही पूछा. “पता है क्या…10 महीने में ये पहली बार है की उसका फोन खुद मुझे रात में आया, वरना हमेशा मैं ही करता हूँ” रोहन ने अपना कॅन नीचे रखते हुए कहा, “इतनी बुरी नहीं है वो बल्कि अच्छी ही है, बहुत अच्छी “. शायद वो बियर बोल रही थी.

अगले दिन सूरज लेट उठा, जैसे ही अपना ब्लॅकबेरी देखा तो उसमें 3 मिस्ड कॉल और 1 एसएमएस था. एसएमएसस खोला तो उसमें लिखा था “शुक्ला जी क बेटे को बोल के, तुम्हारा रेज़्यूमे केपीएमजी में डलवाया है. परेशान मत होना, जल्दी कुछ हो जाएगा- पापा”. बियर तब तक उतर चुकी थी.

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